| وَشيَ الرّبيعِ به، يدُ الأنواءِ |
|
|
ومَجَرِّ ذَيلِ غَمَامَة ٍ قد نَمّقَتْ، |
| |
| مضروبة ٍ من سرحة ٍ غناءِ |
|
|
ألقيتُ أرحُلَنا، هناكَ، بقُبّة ٍ |
| |
| مخضرة ٍ وقرارة ٍ زرقاءِ |
|
|
و قسمتُ طرفَ العينِبينَ رباوة ٍ |
| |
| مَعصورَة ٌ مِن وَجنَتَيْ عَذراءِ |
|
|
و شربتها عذراءَ تحسبُ أنها |
| |
| و غنائها وخلائقِ الندماءِ |
|
|
حَمراءُ صافيَة ٌ، تَطيبُ بنَفْسِها |
| |
| مفترة ٌ عن لؤلؤِ الأنداءِ |
|
|
خُذها، كما طَلَعتْ علَيكَ عَرارَة ٌ، |
| |
| |
|
|
|
| |